Home HUMOUR जाणिये, 100 के नोट के उपर छापे ऐतिहासिक विरासत का रहस्य

जाणिये, 100 के नोट के उपर छापे ऐतिहासिक विरासत का रहस्य

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भारतीय रिजर्व बँककि तरफ से 100 का नया नोट चलन में लाया जाने वाला है. ये नोट अगस्ट के एंड में बाजार में आने कि संभावना है. इस नोट पर विश्व धरोहर में शामिल गुजरात कि ऐतिहासिक राणी कि बाव का चित्र छापा गया है. बाजार में जितना नया नोट को महत्व है उतनाही महत्व इस राणी कि बाव को है. तो जाणते है इस ऐतिहासिक धरोहर का रहस्य.

 

 

गुजरातमें पाटण में ग्यारहवी शताब्दी में राणी उदयमतिके प्रेम का प्रतिक मानकर राजा भीमदेव ने यह बाव तैयार कि.

 

ऐतिहासिक राणी कि बाव सोलंकी साम्राज्य के दौरान बांधी गयी थी. यह बाव 64 मीटर लांबी और 20 मीटर चौढी है और इसकी गहराई 27 मीटर है. संयुक्त राष्ट्रसंघने इस बाव को जागतिक धरोहर में शामिल किया है.

 

राणीकी बाव मारू-गुर्जरां आर्किटेक्चर स्टाईल में बांधी गयी है. बाव में एक छोटा दरवाजा है उसमे 30 किलोमीटर कि गुफा है. सरस्वती नदी को यह गुफा जोडी गई है. सातवी शताब्दी में सरस्वती नदी लुप्त हो गई थी तब ये बाव कीचड में दफन हो गई थी. भारत के पुरातत्व विभाग ने इस बाव को फिरसे ढूड निकाला.

 

बाव में नक्षीकाम और अनेक प्रकारके कलाकृती मूर्ती में तैयार कि गई है. यह कलाकृती भगवान विष्णू से संबंधित है. भगवान विष्णू के दस अवतार इस कलाकृती में दिखाये गये है, इसमे कल्की, राम, कृष्ण, नरसिम्हा, वामन, वाराही इसके साथ विष्णू के मुख्य अवतारोंका भी समावेश है. इस बाव में 500 से ज्यादा मूर्तीओंका समावेश है.

 

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